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Tuesday, April 16, 2013

=> 'नई पीढ़ी' ने किया ब्लैकमेलर का खुलासा


'मेरठ बार असोसिएसन' हुआ लामबन्द

त्रिनाथ मिश्र
                                         ब्लैंक स्टाम्प पेपर बेचने की बात कह कर अधिवक्ता को ब्लैकमेल करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मेरठ बार एसोसिएशन के अधिकारियों ने विरोध व्यक्त कर एसएसपी को ज्ञापन दिया और बताया कि आरोपी विजय कुमार शुक्ला मोबाईल नं0 09058928473 से बार-बार फोन कर नोटेरी अधिवक्ता से एक लाख रूपये की मांग कर रहा है तथा न देने की स्थिति में जेल भिजवाने व लाईसेंस निरस्त कराने की धमकी दे रहा है धमकी। गौरतलब है कि शाकिर हुसैन परिवार न्यायालय के सामने मेरठ कचहरी में नोटेरी का कार्य करते हैं। बतौर शाकिर हुसैन, विजय शुक्ला ने कहीं से मेरे नाम का दस्तावेज बनवा कर मुझसे एक लाख रूपये की मांग कर रहा है। तथा न देने पर जान से मारने व वकालत का पेशा खत्म कराने की धमकी दे रहा है।

'नई पीढ़ी' ने किया ब्लैकमेलर का खुलासा
                                           अधिवक्ता ने यह व्यथा 'नई पीढ़ी' से कही, 'नई पीढ़ी' ने अपने स्तर से जांच पड़ताल करनी शुरू की तो मामला परत दर परत खुलता चला गया और आरोपी विजय कुमार शुक्ला की बातें भी रिकार्ड हुयी जिसमे वह वकील से एक लाख रूपये की मांग कर रहा है।

                        
  • फर्जी स्टाम्प बेचने व ब्लैंक स्टाम्प के आरोप में जेल भेजने की दे रहा था धमकी।
  • एक लाख रूपये न देने पर लाईसेंस निरस्त कराने की चेतावनी भी दी।
  • एसएसपी ने एसपी क्राईम को दिये जांच के आदेश।
                        

अधिकारी मुझसे डरते हैं:-
                                      आरोपी ने अधिवक्ता से रौब गालिब करते हुए धमकी भरे लहजे में कहा कि अधिकारी क्या जाने काम करना, उनसे मैं काम करवाता हूं। इससे पहले भी दो वकीलों का लाईसेंस निरस्त करवा चुका हूं। मैं एक एन0जी0ओ0 का कर्मचारी हूं मेरे सम्पर्क में बडे-बडे अधिकारी हैं।
पहले मांगे बीस हजार अब एक लाख
                                       आरोपी विजय शुक्ला ने पहले 20 हजार रूपये मांगे और निर्धारित समय पर न मिल पाने की वजह से वह एक लाख रूपये की मांग कर बैठा। जब अधिवक्ता ने ब्लैंक स्टाम्प के मामले को फर्जी बताया तो उसने कहा की जैसे तैसे इसे पचास हज़ार में निपटा लो वरना तुम्हारा लाइसेंस मई रद्द करवा दूंगा।

Saturday, April 13, 2013

=> मेरठी पुलिस क्या न कर दे !



त्रिनाथ मिश्र की रिपोर्ट

मेरठ वैसे तो विभिन्न क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति शिखर पर दर्ज कराता आ रहा है मगर पुलिस विभाग की कार्यशैली पर प्रश्नचिहन के मामले में शायद अब मौक़ा आया है। मेरठी पुलिस को सही गलत से तो मतलब है ही साथ ही ये पीड़ित व आरोपी पक्ष की जेब, पहनावे, बिजनेस व पत्नियों तक पहुँचने में कोई कोर कसर नही छोड़ते, पिछले दिनों तमाम ऐसे वाकये प्रकाश में आये जिससे पुलिस प्रसाशन पर आरोपों की झड़ी लगी रही- जिसका जवाव स्वयं पुलिस भी नहीं दे पाती।आइये पिछले दिनों घटित ऐसी कुछ घटनाओं पर प्रकाश डालते है-

 थाना नौचंदी। 
आरोपी को छोड़ दिया- एसओ ने कहा मुझे जानकारी नहीं, जमकर हंगामा
                                                     उप्र का पहला 'हाईटेक थाना' के नाम से जाना जाने वाला यह थाना कमाई के लिहाज से ख़ास मायने रखता, यहाँ पर आने वाले मामलो को 'मुर्गा' आ गया की तर्ज पर ट्रीट किया जाता है। पिछले साल भर में यहाँ पर एसओ पर रिश्वतखोरी के कई मामले प्रकाश में आये, मगर कुछदिन पहले की घटना ने तो बिलकुल हद ही कर दी। मामला है सपा नेता के भतीजे की स्कार्पियों में टक्कर मारने व विरोध करने पर घसीटकर पीटने का। लिसाडी गेट थाना क्षेत्र के इस्लामावाद मोहल्ले के सभासद आदिल अन्सारी का भतीजा तंजीम, दिलशाद व उसके दोस्त स्कार्पियो से कहीं जा रहे थे, पीछे से आ रहे टेम्पो ने उसमे टक्कर मार दी, इस पर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गयी तथा टेम्पो ड्राइवर ने कुछ सहयोगियों की मदद से तंजीम पक्ष पर जानलेवा हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया। टेम्पो चालाक को उसके साथियों के साथ पकड़ कर मौके पर पहुंची फैंटम को सौप दिया गया मगर थोड़ी ही देर में बिना जांच-पड़ताल किये ही आरोपी को छोड़ दिया गया, इसी बात पर हंगामा हो गया। मौके पर एसपी सिटी ओम प्रकाश, सीओ सिविल लाइन विकाश चन्द्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल आ धमका।  पीड़ित पक्ष की ओर से सपा नेता रफीक अंसारी सहित अन्य नेता भी आ गए जिन्होंने पुलिस से जमकर झड़प की। 

पुलिस के पास नही था जवाब :
                                                     इस 'हाईटेक कांड' के बाद एसओ नौचंदी को पसीना आ गया, एसपी सिटी ओम प्रकाश व सीओ विकाश चंद त्रिपाठी भी बगलें झांकते नजर आये। आरोपी को छोड़ने की सूचना एसओ को नहीं है, की बात सुनकर पब्लिक भी नाराज होने लगी। थोड़ी ही देर में आरोपी थाने के पिछले गेट से अन्दर बुला लिया गया तथा मुकदमा दर्ज कर कार्यवाई के अस्वासन पर ही मामला शांत हुआ।

 थाना भावनपुर। 
चोरी की गाडी से घूमते हैं एसओ:
                                                      चोरी की गाडी से चलना आम आदमी के लिए नियम विरुद्ध है मगर पुलिस वालों के लिए शायद नहीं। तभी तो एसओ भावनपुर आईजी साहब की मीटिंग में दरोगा पर हमले में प्रयुक्त चोरी की स्कार्पियो लेकर पहुंचे, इस बाबत पॊञ्चे जाने पर उन्होंने सफाई दी की मीटिंग में समय पर पहुँचने हेतु मैंने गाडी का प्रयोग किया। आईजी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित कार्यवाई के सख्त निर्देश दिए हैं, और कहा की पुलिस नियमों को ताक पर रखकर पब्लिक को सकारात्मक सन्देश नही दे सकती।

 थाना सदर। 
जब सोतीगंज से घबराये इन्स्पेक्टर:
                                                      दिल्ली टूरिज्म कंपनी की कैब चोरी होने पर उसकी लोकेसन सोतीगंज पायी गयी, जब इस बात की सूचना इन्स्पेक्टर सदर मुनेन्द्र यादव को दी गयी तो उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा की, 'गाडी यदि सोतीगंज चली गयी तो मेरे बस की नहीं है वहा से बरामद करना।" इन्स्पेक्टर के इस बात से बवाल होने तो बच गया मगर मेरठी पुलिस पर 'वाहन कमेला' नाम से मसहूर सोतीगंज के नाम से डर जाने का ठप्पा तो लग ही गया।

 थाना कंकरखेडा। 
आरोपी छूट जाता है एसओ को पता नहीं चलता:
                                                       १-अप्रेल को जवाहर्पुरी निवासी विजयपाल के यहाँ से मोबाइल चोरी की सूचना पर दबिश देकर चोर को पकड़ लिया गया मगर रात में ही अपने आदत के अनुरूप पुलिस ने सेटिंग कर आरोपी को छोड़ दिया, एसओ कंकरखेडा से जानकारी ली गयी तो उन्होंने बताया की आरोपी छूटने की बात संज्ञान में ही नही है! बताओ भला, फिर किस बात के इंचार्ज?

 थाना ब्रह्मपुरी।  
ठाने से मोबाइल, अंगूठी व पर्स गायब:
                                                        फेसबुक पर अश्लीलता फैलाने वाले व देवी-देवताओं के चित्रों में फेरबदल कर शहर की फिजा व अमन बिगाड़ने वाले अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया, थाने से जाते समय जब उन्होंने अपने पर्स, अंगूठी व मोबाइल मांगे तो थाने पर मौजूद सिपाही ने एक मोबाइल पकड़ाकर चलता होने की बात कह दिया तथा बताया की अन्य कोई भी मोबाइल नहीं है जबकि हवालात में जाते वक़्त सारे सामान पुलिस के कब्जे में दे दिए जाते हैं।  

 गृहकर चोरी में भी आगे।   

                                                         उपरोक्त तमाम वाकया पढ़ने के बाद लगे हाथ एक और बात बताते चलें की पुलिस का काम और आत्मविश्वास हर जगह कायम है और रहेगा भी। इस बात का प्रमाण हाल ही में मिल गया जब चोरी में मेरठी पुलिस का नाम सामने आया। लखनऊ में आयोजित बैठक में नगर विकाश विभाग के सचिव सीबी पालीवाल ने मेरठ समेत अन्य जनपदों के गृहकर चोरों की लिस्ट उजागर की जिसमे मेरठी पुलिस की उपस्थिति दर्ज है। नगर आयुक्त मेरठ अब्दुल सबद के मुताबित मेरठ के कुल बकाया 12करोड़ वसूलने हेतु गृहकर चोरो को नोटिस भेज दिया गया है मगर अभी तक बकाया जमा नही हो सका है।
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बकाया 
 एसओ कंकरखेडा पर 1.32 लाख। 
 एसओ परतापुर पर 54 हज़ार। 
 पुलिस आवास विकाश निगम पर 13.24 लाख। 
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पुलिस को बधाई!
मुर्दा हुआ जिन्दा, एसएसपी हुए चकित                                                 

एसएसपी समेत अन्य अधिकारी उस समय चकित हो गए जब मुर्दा बदमाशों के जिन्दा होने का प्रमाण मेरठी पुलिस ने दिखा दिया, बदमाशों की सूची में भी मेरठी पुलिस हेरफेर कर वाहवाही लूटने के चक्कर आला अधिकारियों को नमकीन हंसी का अनुभव हुआ। दरअसल क्राइम कंट्रोल को लेकर शहर में सक्रिय बदमाशों की सूची एसएसपी दीपक कुमार ने तलब की जिसमे 42 गिरोह के कुल 270 बदमासों में से लगभग 70 क्रिमिनलों ने धरती का बोझ हल्का कर दिया है, मगर आश्चर्य इस बात का है की इन मृतक बदमाशों को पुलिस ने आज भी जिन्दा कर रखा है तथा बाकायदा फ़ाइल भी मेंटेन होती है। ट्रेनी आईपीएस स्वप्निल ममगई को इस केश की बागडोर दी गयी है जिसे वे सही करने में जुट गए है।

कुछ दिन पहले ही फरमा गए साहब!
पुलिस नम्र व्यवहार वरते: एडीजी-अरुण कुमार 

सर्किट हाउस में कुछ दिन पहले ही पुलिस की बैठक कर एडीजी अरुण कुमार हिदायत दे गए थे की पुलिस जनता के साथ नम्र व्यवहार वरते तथा सामुदायिक पुलिशिंग का बढ़ावा दे। थाने पर आये हर व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज करें, अच्छा वर्ताव करें ताकि कानून और पुलिस पर का विश्वास बढे। मगर आज भी न जाने क्यों जनता थाने पर जाने से और रिपोर्ट लिखवाने से घबराती है?

Friday, March 22, 2013

=> पप्पू पास हो गया है (व्यंग कविता)


                                   जीत कर इलेक्शन खास हो गया है 
                                   कल तक कमरा था किराए का
                                   आज कोठी है अपनी,

                                   देखिये ना कितना विकास हो गया है।
(हमारा क्या विकास हुआ?)
चोरी बढ़ी डकैती बढ़ी अपह्ररण बढ़े बल्लातकार बढ़ गये
आँख खोल कर देखो तो, हम कितनी आगे यार बढ़ गये
काले घन्धे वाले सेठ बढ़ गये, घोटालों के वेट बढ़ गये
दलालों के रेट बढ़ गये, नेताओं के पेट बढ़ गये
वो तब भी कमाते थे, वो अब भी कमाते हैं
हमारी फूट गई गुल्लकें, उनके विदेशों में खाते हैं
उनकी नकदी बढ़ी, हमारे उधार बड़ गये
आँख खोल के देखो तो
हम कितने आगे यार बड़ गये???

                                                                                          - शांति स्वरुप अनाड़ी

Wednesday, March 20, 2013

=> अथातो होली जिज्ञासा


                                      होली, बस्ती-बस्ती में हँसती सस्ती मस्ती का त्यौहार है। हम भारतवासियों का तो इस पर जन्मसिद्ध अधिकार है। आदिकाल से हमने कैसी-कैसी होलियाँ अपने तन पर झेली हैं। जब रंग नहीं मिलता था तो ख़ून की होलियाँ भी खेली हैं। वो तो शेयर की गिरावट की वजह से त्यौहार की तासीर बदल गई। रही-सही जमा पूँजी को आर्थिक मन्दी निगल गई। वर्ना एक ज़माना था जब लोग चन्दन और केसर से होली खेला करते थे। एक-दूसरे के ऊपर कीचड़ नहीं अबीर उड़ेला करते थे। इस धरती के अंग-अंग पर चंदन-केसर का रंग बहा है। इसीलिए अपने पदों में मीराबाई ने कहा है- 
चोवा चन्दण अरगजा म्हा, केसर णो गागर भरी री।
मीरा दासी गिरधर नागर, चेरी चरण धरी री।।
                                     हम तो पनघट के मीठे पानी से होली खेला करते थे। रंग के बर्तन खींच-खींच कर भरते थे। हम गंगा की गोदी के बाशिन्दे हैं। सौ हमलों के बाद अभी तक ज़िंदे हैं। ये अलग बात है हमारे बागों में अब कोई रंगीन फूल नहीं खिलता। होली के लिए पानी कहाँ से लाएँ ‘पीने’ को साफ पानी नहीं मिलता। आज हाथों में टेसू और पलाश नहीं हैं। मगर हम तनिक भी निराश नहीं हैं। हमें अपनी संस्कृति ऊपर उठानी है। त्यौहारों की परम्परा बचानी है। इसलिए हिन्दुस्तान दूसरी राहों पर चल दिया। रंगों से खेलने का तरीका ही बदल दिया। लोगों ने अपना पुराना साहित्य टटोला। उपेक्षित पड़ा हुआ हर पृष्ठ खोला। अचानक अंधेरे में प्रकाश मिल गया। जिस्म का रोम-रोम हिल गया। एक पुरानी पुस्तक में सूरदास का गान लिखा मिल गया। भारत की समस्या का समाधान लिखा मिल गया
एक कोध गोविन्द ग्वाल सब, एक कोध ब्रज नारि।
छाड़ि सकुच सब देति परस्पर, अपनी भाई गारि।।
                                     पद का अर्थ बताने के लिए लोगों ने नेताजी को याद किया। जिन्होंने दो मिनट में उसका हिन्दी में अनुवाद किया। ‘‘खेलते-खेलते जब गोपियों-ग्वालों का रंग समाप्त हो गया। सारे ब्रज में संकट और भय व्याप्त हो गया। तो सब ने शर्म-संकोच छोड़ दिया। मर्यादा का हर बंधन तोड़ दिया। ग्वाले हारे नहीं, गोपियाँ भी होली खेलीं। रंग की जगह इक-दूजे पर गालियाँ उड़ेलीं।’’ लोगों ने नेताजी को पलकों पर बिठाया। सबको ये सुन्दर अनुवाद बहुत भाया। नेताजी ने यहीं पर पीछा नहीं छोड़ा। अपनी तरफ से भी साहित्य जोड़ा। वो बोले-केवल ब्रज में ही नहीं अयोध्या ने भी गालियों पर नर्तन किया है। सूरदास जी की बात का तुलसीदास जी ने भी समर्थन किया है। अयोध्या में भी गालियों का बड़ा महत्व रहा है। इसीलिए तुलसीदास जी ने भी कहा है-
चढ़े खरनि विदूषक स्वांग साजि।
करैं कटि निपट गई लाज भाजि।।
नर-नारि परसपर गारि देत।
सुन हँसत राम भइन समेत।।
                                     लोगों ने नेताजी के जयघोष का तूफान उठाया। उन्होंने झट-पट उसका भी अनुवाद बताया- ‘‘अयोध्या में लोग गधे पर बैठे और रंग बरसते रहे। नर-नारियों ने एक-दूसरे को गालियाँ दीं और राम हँसते रहे।’’ लोगों ने पहली बार उनके पाण्डित्य को जाना। उनकी विद्वता को पहचाना। नेताजी की बात में दम था। इस होली में ख़र्चा भी कम था। लगा जैसे किसी स्लम डाग को सौ करोड़ दे दिया। नेताजी ने आर्थिक मन्दी का तोड़ दे दिया। मगर गालियाँ देने के लिए शर्म छोड़नी ज़रूरी थी। इस मुश्किल से निपटने की तैयारी भी पूरी थी। मोहल्ले के एक छुटभैये ने कहा-चिन्ता है बेकार। मैं बताता हूँ इस समस्या का उपचार। हालाँकि हिन्दुस्तानियों को ‘दोबारा’ शर्म-त्याग की ज़रूरत नहीं है। मगर दूसरी और कोई सूरत नहीं है। मेरे दिमाग़ में आइडिया कुछ देर बाद आता है। अभी किसी शायर का शेर याद आता है-
गुलाबी गाल पर कुछ रंग मुझको भी जमाने दो।
मनाने दो मुझे भी प्रीत का त्यौहार होली में।।
यूँ भरकर जामे-मय गैरों को देते हो तो मुझको भी।
नशीली आँख दिखलाकर करो सरशार होली में।।
                                      छुटभैये ने आक्रोश में कहा। मुट्ठी बाँधकर पूरे जोश में कहा। मेरे दिमाग से ये समाधन कीजिए। मदिरा की बोतलों का सभी पान कीजिए। उसके बाद जिसे चाहे पकड़ लेना, जिसे चाहो छोड़ देना। हज़ार गालियाँ देना या सर फोड़ देना। किसी को कोई भी परेशानी नहीं आएगी। शर्म तो ख़ुद शर्माकर भाग जाएगी। लोगों ने तालियों से आकाश गुंजाया। सबको ये प्रस्ताव पसन्द आया। तब से हमारे संस्कार, होली की राह तकते हैं। लोग केवल शराब पीते और गालियाँ बकते हैं। तभी मोहल्ले का एक फौजी, चिल्लाया। आप यहीं ठहरो मैं अभी आया। सबकी आँखों में ख़ुमारी की पायल छनक रही थीं। फौजी बाहर आया तो हाथों में बोतल खनक रही थीं। दो मिनटों में मण्डली जम गई। कभी ‘व्हिस्की’ उठी कभी ‘रम’ गई। सभी जामो-बोतल को चूमने लगे। पीकर-बिना पिए झूमने लगे। तभी एक कुरकुले बूढ़े ने खाया भांग का गोला। धेती सम्भालता हुआ वो बोला- कोई ना कहे मुझसे, क्या बात करता हूँ। मैं आज कवि-सम्मेलन की शुरुआत करता हूँ। बूढ़ा मस्ती और उमंग में आ गया। एक पव्वे में तरंग में आ गया। उसने सबको आँखों-आँखों में तोला। और खड़ा होकर बोला-
तुम सब लोग गंवार हो, सुनो ये मेरी बात।
केवल मैं विद्वान हूँ, बाकी सब बदजात।।
                                     बूढ़े की हिम्मत देखकर गली का आवारा ‘हरिया’ झूम गया। बुढ़ापे में ये हौंसला देखकर उसका दिमाग़्ा घूम गया। उसने भी ताल ठोंकी। एक गिलास शराब और झौंकी। उसकी आँखों में नशा बहने लगा। वो खड़ा होकर कहने लगा-
पत्ते सारे झड़ गए, बची है सूखी डाल।
हममें सबसे मूर्ख है, ये बूढ़ा कंकाल।।
                                   कविताओं का दौर शुरु हो गया। भीड़ में इक शोर शुरु हो गया। लोग बजाने लगे ज़ोर-ज़ोर से तालियाँ। चारो तरपफ से आने लगीं शानदार गालियाँ। होली एक तरफ खड़ी डर रही थी। बोतल अपना काम कर रही थी। सभ्यता, शालीनता काई की तरह छंट गई। भीड़ देश की तरह दो हिस्सों में बंट गई। हंगामे और शोर का आगाज़ हो गया। नशे और गालियों का राज हो गया। लोगों में अचानक हाथापाई शुरु हो गईं। लात और घूँसों से धुलाई शुरु हो गई। ज़मीन पर बह गई जो भी बची थी प्याले में। अचानक नेताजी जा गिरे पास के गंदे नाले में। बेचारे अजीब मुसीबत में पँफस गए। गर्दन तक गंदे नाले में धँस गए। वो चिल्लाए-‘अरे गन्दी नाली के कीड़ों! ये मोहल्ला तो पूरा नर्क है। साफ-सफाई का तो बिल्कुल बेड़ा गर्क है। मेरे जीवन की नैया को सम्भालो। ज़ल्दी से मुझे बाहर निकालो। ‘हरिया’ ने अपना मुँह खोला। नशे में बिल्कुल सच बोला- ‘आज नाले में गिर गए तो गन्दगी याद आई। याद करो नाले की सफाई कब कराई? हम इस घुटन में जी-जीकर बेहाल हो गए। इसकी सफाई हुए दस साल हो गए। नेताजी घबराए। पुराने वादे याद आए। वास्तव में ये एक बहुत बड़ा फजीता था। साफ-सफाई के मुद्दे पर ही चुनाव जीता था।
                                नेताजी ने अपने होंठ खोले। और मरी हुई आवाज़ में बोले- ‘इस बार की ये होली नापसन्द आ रही है। पानी से ये कैसी दुर्गन्ध आ रही है? नेताजी का मन जब ज़्यादा घबराया। नशे में झूमता बूढ़ा पास आया। उसने अपना भांग का झोला खोला। और मुस्कराकर बोला- ‘जब से बने हो मेयर ये वक्त बह रहा है। नाले में कमेले का सड़ा रक्त बह रहा है। नेताजी की बुद्धि का संसार खुल गया। सोए हुए विवेक का हर द्वार खुल गया। उन्होंने चिल्लाकर कहा-अब मेरी पगड़ी ज़्यादा मत उछालो। सब ठीक करा दूँगा मुझे बाहर तो निकालो। लोगों को फिर से वादे पर विश्वास आया। एक बच्चा दौड़कर रस्सा उठा लाया। नेताजी कीचड़ में कुछ और गड़ गए। नाले के पुल पे जाकर कुछ लोग चढ़ गए। एक बूढ़े ने रस्सा उठाकर फैंक दिया पानी में। अचानक एक नया ट्विस्ट आ गया कहानी में। बुजुर्ग के हाथों से रस्सा छूट गया। लोगों के वजन से पुल टूट गया।
                               ये मुसीबत वास्तव में बड़ी थी। भीड़ भी नाले में पड़ी थी। अचानक उसी बुजुर्ग ने चुल्लू में कीचड़ भरा। उसका निशाना था एकदम ख़रा। उसने होली को इस अंदाज़ से खेला। सारा कीचड़ नेताजी के मुँह पर उड़ेला। बूढ़े का जिस्म पानी में लहराया। वो गुस्से में चिल्लाया- ‘तुमने इसके ठेके में भी कमीशन खाया था। ये पुल तुम्हीं ने तो बनवाया था। अब लोगों के गुस्से की कोई हद नहीं रही। भीड़ और नेताजी में सरहद नहीं रही। लोगों ने पीटना शुरु किया तो उनके बल जागे। वो पूरी ताकत से निकलकर भागे। एक बच्चे ने उनके पैर को जकड़ लिया। किनारे पर आकर उनको पकड़ लिया। कीचड़ सभी की नाक के नथुनों में भर गया। दुर्गन्ध यूँ उठी के नशा भी उतर गया। अफसोस सबको अपने इस हाल पर हुआ। फिर गाँव सारा एकजुट चैपाल पर हुआ।
                            नेताजी ने कहा-‘भगवान का शुक्र है मैं अभी तक ज़िंदा हूँ। अपने किए पर सच में शर्मिन्दा हूँ। अब मैं अपनी जनता को ख़ुशियों से भरूँगा। किया हुआ हर वादा पूरा करूँगा। लोगों ने कसम खाई की अब इज़्जत से जिएँगे। भूलकर भी होली पर शराब नहीं पिएँगे। पूरा गाँव होली को प्यार से भरेगा। कोई एक-दूसरे से झगड़ा नहीं करेगा। सबने कहा शराब, भांग, नशा सब बेकार है। होली केवल रंगों और मस्ती का त्यौहार है।
कुमार पंकज
कवि/गीतकार
49-ए, न्यू फ्रेण्ड्स कालोनी, मेरठ

Tuesday, March 19, 2013

=> क्रान्ति धरा के लिए ऐतिहासिक प्रयास है नई पीढ़ी अखबार



                                       नई पीढ़ी साप्ताहिक समाचार पत्र के विशेष एनसीआर संस्करण की लांचिंग के अवसर पर साहित्यिक परिचय सम्मेलन का आयोजन किया गया। नई पीढ़ी मेरठ के मुद्दों को लेकर एक ऐसी पहल है जो मेरठ के अखबारों में अपनी एक सकारात्मक पहचान बनाने के साथ युवाओं को उचित मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगा क्योंकि आज के समाचार पत्रों का ज्यादा से ज्यादा ध्यान धन की प्राप्ति करने के साथ अभ्रद विज्ञापन और फोटों को प्रकाशित करने में है। समाचारों पत्रों की ऐसी दयनीय स्थिति से कोसों दूर नई पीढ़ी समाचार पत्र सभी व्यक्तियों में उचित विचारधारा के साथ समाचार का प्रकाशन कर राष्ट्र का अभिमान प्राप्त करने में सफल हों। मां शारदे का नमन करते हुए कार्यक्रम का संचालन आकाशवाणी पर कई कार्यक्रम कर चुके ललित तारा ने किया। मेरठ के मशहूर कवियों और शायरों ने कार्यक्रम में शिरकत कर नई पीढ़ी समाचार पत्र को काव्यात्मक रूप से ढ़ेरों बधाई दीं। 
 
डा ज्ञानेंद्र बनें कार्यक्रम के केंद्र बिंदु 
                                          कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डा ज्ञानेंद्र शर्मा रहें कार्यक्रम में इनके साथ एक मुख्य बात यह रहीं कि मेरठ कालेज में प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति की बात को साझा कर इंहोने अपनी खुशी का इजहार किया। नई पीढ़ी के लिए दो शब्द कहते हुए इंहोने कहा कि क्रांतिधरा के लिए नई पीढ़ी अखबार बहुत बड़ा ऐतिहासिक प्रयास है। एक बार फिर से जनजागरण होगा औैर युवा इसमें अपना सहयोग देकर देश को समृ़िद्ध प्रदान करेंगंे। 

कवियों और साहित्यकारों ने की दिल से शिरकत 
                                            इलाहाबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता के पद पर कार्यरत डाॅ0 नीलकमल शर्मा कार्यक्रम के अध्यक्ष रहें, जबकि ईश्वर चंद्र गंभीर कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रहें। साथ ही कार्यक्रम में वीरेश त्यागी, शान्ति स्वरूप गुप्ता, कवि रामचंद्र रमेश, राजकुमार शर्मा राज, ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वहीं सुभारती विवि0 के डाॅ0 मोहन गुप्ता, डा युसूफ खान, डा युनुस खान, गुरमीत साहनी, सुलक्षणा अंजुम, अजय शर्मा, अनिल, शान्ति स्वरूप अनाड़ी, प्रदीप सरावा, भी कार्यक्रम में अपनी कविताओं के साथ पहुंचें। युवा कवियों मंे पुजा रावत,  आदर्शिनी श्रीवास्तव,  आईआईएमटी रेडिओ के डायरेक्टर विवेक चौधरी और कुमार पंकज, शचींद्र शेखर ने समारोह की शोभा बढ़ाई। इस दौरान इंजीनिअर सुधीर प्रकाश एवं डॉ नील कमल शर्मा का सराहनीय योगदान रहा।

काव्य वो है जिसें कहें बिना रहा न जाएं
                                            रामचंद्र वैश्य ने अपने शब्दों में नई पीढ़ी के सम्बोधन में कहा कि 
जो नई पीढ़ी का ध्यान रखें वो ही सबका सुखचिंतक है, 
 सभी की चाहत आशा हों वो ही सबकी हिम्मत है,,
शान्ति स्वरूप अनाड़ी ने पाकिस्तान की अभद्रता देखते हुए तीखे स्वर में कहा, 
सिर के बदलें सिर, लात के बदलें लात पाकिस्तान तुम्हें दिखा देंगंे तुम्हारी औकात। 
युसूफ युगल ने देश में बढ़ते आतंकवाद, किसान आंदोलन, घोटालों और यौन उत्पीड़न पर काव्य पंक्ति प्रस्तुत की साथ ही अखबारों पर शायरी करते हुए कहा, 

"हिन्दुस्तान, अमर उजाला या नई पीढ़ी, जागरण 
घर बैठे दिखा रहें है ये संसार देखिए, 
निकला है आज का अखबार देखिए"

                                     साथ ही आदर्शिनी श्रीवास्तव ने भी अपनी सुरीली वाणी में ’’रंग में भीगी हूं प्यार अभी बाकी है’’ काव्य पंक्तियां प्रस्तुत कर सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 
युवा कवि विवेक चौधरी ने नई पीढ़ी को अपनी शुभकामना देते हुए काव्य स्वर में आत्मविश्वास के साथ कहा चांद को लक्ष्य बनाओं यदि चुक भी जाओं तो तारा बन जाओं  
पुजा रावत ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में शायराना मिजाज में कहा 
"रोशनी कि अब किसी को जरूरत नहीं,असत्य का जिसने दुशाला पहना उसका सम्मान होता रहा 
और जिसने सच का दुशाला पहना वो भरी सभा में बार बार अचंभित होता रहा।"
हिंदी, उर्दू और अग्रेंजी तीनों भाषाओं की ज्ञाता सुलक्षणा अंजुम ने नई पीढ़ी समाचार पत्र को शुभकामना और प्रेम से ओतप्रोत शायरी बयां करते हुए इन्होने कहा कि आज हम युवा पीढ़ी को कोसते रहते है कि ये सड़कों पर ईधर उधर धूल फांकते रहते हैं अगर गहराई में जाकर देखें तो इनके सामने बेरोजगारी और महंगाई जैसी समस्याओं से फुरसत ही नहीं मिलती कि वो कहीं दिल लगाएं। यहीं कारण है कि-
"नौजवान पीढ़ी को फिक्र रोजी रोटी की,
नौजवान पीढ़ी से अशिकी नहीं होती"

                                   डा0 सुदेश यादव जख्मी ने होली पर प्यार के भरें मुक्तक की प्रस्तुत कर सब के मन में होली की उत्सुकता को दुगना की दिया। 
"न जाओ छोड़कर हमको, सनम इस बार होली में,
मिटा दो नफरतें दिल से, मिला दो प्यार बोली में,
अगर बन जाये तू राधा, तो मैं बन जाउंगा कान्हा,
अमर हो जायेगा ये प्यार भी इस बार होली में।"
साथ ही कवि राजकुमार शर्मा ने होली पर अपनी मस्ती भरी कविता को सुनाकर दिल में नई उमंग भरने का प्रयास किया।
"हर चेहरे सजी रंगोली है, उल्लास हास की बोली है
मस्ती की मस्त ठिठोली है, देवर भाभी की मुहं बोली है
जीजा साली की आंख मिचैली है, गुलाल गाल की हम जोली है
पिचकारी की मादक गोली है, अक्षत चंदन रोली है
उमंग तरंग की टोली है, दिल की खिड़की खोली है
भीगी चूनर चोली है, प्यार भरी ये होली है"
                                      कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने नई पीढ़ी समाचार की सराहना करते हुए अपने विचार व्यक्त किए और कहा यह भी कहा कि यह समाचार पत्र नई सोच, नया शिक्षक, विद्या और ज्ञान के साथ प्रकाश करता रहेंगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में समस्त नई पीढ़ी टीम मेरठ का पूरा सहयोग रहा। 

Friday, March 8, 2013

=> ध्वस्त हो चुकी इमारत में फंसे लोगों तक पहुँचना हुआ आसान

                                      दुर्घटनाएँ होती रही हैं, और आगे भी होती रहेंगी. हम दुर्घटनाओं को होने से रोक नहीं सकते परन्तु दुर्घटना के समय राहत और बचाव कार्यों को सुचारू रूप से अंजाम देना हमारे हाथ में है. दुर्घटना के समय कम से कम जानहानि हो इसके लिए जरूरी है कि आम लोग तथा बचाव दल आपस में हर समय जुड़े रहें तथा सुचनाओं का आदान प्रदान अच्छी गति से जारी रहे।
                           यह सम्भव हो सकता है मोबाइल और इंटरनेट संचार माध्यमों की मदद से. लेकिन होता यह है कि जब भी कोई बड़ी दुर्घटना होती है यही दोनों माध्यम काम करना बंद कर देते हैं. भुकम्प, सुनामी, बम धमाका, विमान का गिरना आदि दुर्घटनाओं के समय मोबाइल सम्पर्क का कट जाना आम बात है।
                           इस स्थिति से निपटने के लिए अब यूरोप के संशोधकों ने एक नई तकनीक विकसित की है. इस तकनीक की मदद से गम्भीर से गम्भीर दुर्घटना के दौरान भी बचावकर्मी अपने फोन और इंटरनेट के माध्यम से बाकी दुनिया से जुड़े रह पाएंगे।
                            DeHiGate नामक इस तकनीक मे एक विशेष राउटर और एक विशेष कमांड वेहिकल का इस्तेमाल किया जाता है. यह राउटर उस कमांड वेहिकल को किसी भी उपलब्ध वायरलेस इंटरनेट सम्पर्क का इस्तेमाल करने की शक्ति प्रदान करता है. यहाँ तक कि उपग्रह सम्पर्क भी स्थापित किए जा सकते हैं. राउटर अपने नेटवर्क पर उपलब्ध बैंडविथ की गणना करता रहता है और उसमें कमी दिखाई देने पर दूसरे नेटवर्क पर चला जाता है या फिर सीधे उपग्रहों से सम्पर्क स्थापित कर लेता है. स्थानीय नेटवर्क को आपस में जुड़ा हुआ रखने के लिए शहर भर के पोल आदि जगहों पर नोड लगाए जाते हैं जो बैटरी से चलते हैं. इससे मोबाइल लोकल नेटवर्क भी बन जाता है।
                              इससे होता यह है कि बचाव कार्यों में लगे सुरक्षाकर्मी एक पल के लिए भी नेटवर्क से बाहर नहीं जाते. बचावकर्मी जीपीएस के माध्यम से अपनी व साथियों की भौगोलिक उपस्थिति जान पाते हैं. वे अपना खुद का स्थानीय नेटवर्क भी स्थापित कर पाते हैं. इससे ध्वस्त हो चुकी इमारत में फंसे लोगों तक पहुँचना आसान हो जाता है क्योंकि फंसे हुए लोग अपने मोबाइल के माध्यम से बाकी दुनिया से जुड़े रहते हैं।
                             यह तकनीक फ्रांस की कम्पनी थालेस ने विकसित की है।

- साभार तरकश डाट कॉम 

=> इन उपहारों पर भी नजर डाल लें

होली पर मित्रों को उपहार देने की सोच रहे हैं तो इन उपहारों पर भी नजर डाल लें, इन्हें आधुनिक तौर-तरीका भी कह सकते है और उपहार देने का ‘गीक’ अंदाज भी-

गैजेट, मिठाई, कूपन वगेरे दे कर बोर हो गए हैं तो इन्हें आजमाएं -


  1. प्रिमियम मेल अकाउंट भेंट में दें. जी हाँ, जीमेल सहित कई मेल कम्पनियाँ अतिरिक्त भंडारण के लिए जगह देती है, बस उसके लिए कुछ शुल्क चुकाना होता है. अपने मित्र के लिए यह आप कर सकते है।
  2. आपका मित्र अगर फोटोग्राफर है या फोटो साँझा करने के मामले में दीवाना है. तो उसे फोटो शेयरिंग साइट का प्रिमियम एकाउंट उपहार दे कर देखिये। 
  3. अपना डूमेन नाम हो, यह हरेक की इच्छा होती है. तो अपने मित्र को उसके ब्लॉग या साइट के लिए एक डूमेन और थोड़ा-सा वेब-स्पेश ही भेंट कर दिजीये।
  4. सॉफ्टवेर देना भी कोई बूरा विकल्प नहीं है. अब तो एंटिवायरस भी महंगे नहीं रहे. ऐसे में मित्र को ‘असली वाला’ एंटिवायरस भेंट में दें। 
  5. आपका मित्र रचनात्मक क्षेत्र में कार्यरत है तो उसे किसी फोटो या ग्राफिक्स बेचने वाली साइट पर “क्रिडिट-पोइंट” खरीद कर भेंट कर सकते है. जिसे वह अपनी जरूरत व इच्छा के अनुसार उपयोग में ले सकता है।

=> महिला पुरुष के मध्य बढ़ती खाईयों का कारण

                                       
आदर्शिनी श्रीवास्तव "दर्शी" 
 
                                       समाज में नैतिक पतन चरम पर है. अतीत में इस वर्तमान की कल्पना हमने नहीं की थी हमने कभी बच्चों के लिए ऐसा नहीं सोचा था कि हमें ऐसे समाज के दर्शन होंगे, गर्त में जाती हुई नैतिकता और तमाम घटनाओं कि वीभत्सता कल्पना से भी परे है, विकृत हुए मन और दिमाग कि सुधार कि आशा दोबारा नहीं कि जा सकती, क्योंकि दुराचारी मन एक ऐसा दलदल है जिसके पंक से यदि स्वंय को बचा कर न रखा गया तो मनुष्य उसमे धँसता ही जाता है, हाँ इस मनोविकृति कि शुरुआत न हो ऐसा प्रयास जरूर किया जा सकता है,
                                          तमाम संचार माध्यम, इंटरनेट, आपत्तिजनक वेबसाईटस, बच्चों का कम उम्र में ही परिवार और माता-पिता से दूर बाहर जाकर पढ़ना और काम करना उन्हें मार्ग से अधिक भटकने के अवसर देता है, आधुनिक और आर्थिक युग में ये स्थितियां तो आनी ही हैं और बढ़ती भी जानी हैं, लड़का हो या लड़की अब दोनों ही महत्वाकांक्षी और उच्चाकांक्षी हैं और उन्हें समाज में निकलना ही है. कोई भी शिक्षित और समझदार माता-पिता अब अपनी कन्या के लिए भी वही स्वप्न देखते है जो पुत्र के लिए, जिनका सब अच्छा-अच्छा हो गया तो समझो उन्होंने गंगा नहा लिया, किन्तु..., तो अब क्यों न जब तक बच्चे परिवार के सानिध्य में है उन्हें सही संस्कार के साथ कल आने वाले और घृणित युग से टकराने के लिए सक्षम बनाएँ, क्यों न बेटियों को गुडिया गुड्डा के साथ कार, बन्दूक, यंग इंजीनियर, मोनोपोली, रुबिक्स क्यूब, जैसे बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने वाले खिलौने भी दें, क्यों न उन्हें किताबी ज्ञान के साथ जुडो कराटे तैराकी के भी गुण सिखाएँ, क्यों हम लड़कों कि अपेक्षा उन्हें ही त्याग, बलिदान, समर्पण, समायोजन और बर्दाश्त का पाठ अधिक पढाएं, जबकि ये दोनों ही लिंगों के लिय सामान हितकारी है. एक सिगरेट पीती लड़की कि फोटो पर बहुत उपेक्षनीय टिप्पणियाँ आती है तो क्या पुरुषों के लिए ये गर्व का विषय माना जाना चाहिए? बुराई दोनों के लिए बुराई है. हमारा एक के लिए छूट और स्वीकार्य और दूसरी ओर उपेक्षा और बंधन कैसे सही है? दो संतानों के प्रति ये कैसा विभेद? शायद यही महिला पुरुष के मध्य बढ़ती खाईयों का कारण है, ध्यान रखे अब वो समय आ गया है कि जैसा परिवेश, जैसा खेल, जैसी सीख दे वह बेटा बेटी कि बराबर हो. जिससे दोनों ही एक दूसरे के मानवीय गुणों को आत्मसात कर, समानता के अधिकार के सृजित समाज में सम्मानित जीवन व्यतीत कर सकें, वरना शराबी पति आपकी बेटी को कौड़ी कौड़ी मोहताज कर भी देवत्व पद पर आसीन रहेगा, लालची पति रोज़ लात घूँसों से प्रताड़ित कर माएके से धन कि माँग करवाएगा और चुप रहने पर जीते जी अग्नि दहन होगा, आपकी बेटी अपने अनाधिकारी परिजनों से नोची जायेगी और सहनशील कहलाएगी , आपकी बेटी का पति उसी के सामने दूसरी सेज सजायेगा और वो मर्यादित रहेगी, राम सिंह फिर किसकी बेटी का चयन करेगा कहा नहीं जा सकता, ध्यान दे ये किसी महिला को बिगाड़ने कि बात नहीं है और न किसी सीमा का उलंघन, आप शिक्षित ही है जो ये लेख पढ़ रहें है, ये आपकी नवजात, एक वर्ष, चार वर्ष, आठ वर्ष जैसी नन्ही कली कि सुरक्षा और अधिकार कि बात है, अब अगर उसे घर कि चार दीवारी में कैद कर, देवी बना, संस्कार थोप, अनावश्यक... नारी का महिमामंडन कर बंधनों में बाँध मानसिक औए शारीरिक रूप से कमजोर किया तो उस पर हुए अत्याचार और बलात्कार के दोषी हम खुद ही होंगें, उसके निर्णय, आवश्यकता, सुख, इच्छओं, स्वास्थ्य, को शिक्षा को खुलकर महत्व दें,
घर कि महिलाओं को परिवार में ऊँचा स्थान, मान-सम्मान. और महत्त्व दें, अपने व्यवहार में परिवर्तन ला अत्यधिक अपेक्षाएं छोड़ मानसिकता बदलें, घर का बासी भोजन खुशी से मिलकर खाएं, ऐसा कदापि संभव नहीं कि आप अपनी बेटी कि सुभविष्य कि कल्पना कर उपरोक्त तथ्य का समर्थन तो कर रहे और घर कि महिलाओं कि ओर से नजरिया वही है. हम जैसा व्यव्हार अपनी पत्नी के प्रति करेंगे वैसा ही व्यवहार हमारी संतान हमारे प्रति और समाज कि अन्य महिलाओं के प्रति करेगा, अपनी बेटी कि सुरक्षा कि शुरुआत अपने घर से, अपने व्यव्हार में परिवर्तन और दिए गए संस्कार से करें .
कविता के माध्यम से महिला दिवस पे ये पंक्तियाँ समर्पित हैं ----
जीवन की बगिया में प्रेम के रंगों से नित-नित नूतन पुष्प उगायें
चंदा के स्वागत को सजनी के जैसा साजन भी नभ पर आस लगायें
मान बढ़े सम्मान बढे उस जोड़ी पर प्रीत भी शीश झुकाए
चंदा के चरणों में अर्क चढ़ा जो एक दूजे की प्यास बुझायें

Wednesday, March 6, 2013

=> विद्या नालेज पार्क में कमाल खान, प्रिय पाटीदार व नीरव बलवेचा

बागपत रोड स्थित विद्या नालेज पार्क में संस्थापक डाक्टर.सुखबीर सिंह जैन की स्मृति में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में पहुंचे गायक कमाल खान, प्रिया पाटीदार व डांस इंडिया डांस फेम नीरव बलवेचा पत्रकारों से हुए रूबरू।      फोटो: नई पीढ़ी

=> होली से पहले सज गयी दुकाने


 
सुनील कुमार, मुज़फ्फरनगर

                                 होली यूं तो रंगों का त्यौहार है मगर इसे आज कल भारतीय परम्परा के साथ इसलिए भी ज्यादा सम्मान मिलता है क्योंकि इसका सम्बन्ध धर्म से है। भारत विभिन्न रंगों और परम्पराओं को समेटे हुए आज विदेशों में अपना ख़ास मुकाम बनाए हुए है मगर अफसोस यह है की हमारी नयी पीढ़ी अपने इस मुकाम को संभालने में असफल सिद्ध हो रही है, इसका कारण समय की विसंगतियां और जीवन में हर पल प्रतिस्पर्धा का होना बताया जा रहा है। होली में भारत की इस परम्परा में चार चाँद लग जाता है जब शहर में मिठाइयों की दुकानों पर खुसबू और स्वाद का मिला जुला असर नजर आता है। बहरहाल होली के इस अवसर पर मिठाइयों एवं रंगों क खास महत्त्व होता है, त्यौहार के आते ही दुकानों में तरह-तरह की मिठाइयाँ नमकीन, गुझिया को विभिन्न अंदाज में परोसने का अपना हि मज़ा है।
                                   मुजफ्फरनगर स्थित 'नंदी पराडाइज' पिछले आठ वर्षों से अपनी खासियत और परम्परा के मुतावित इस बार भी चार प्रकार की गुझिया, बिस्किट, नमकीन और अन्य मिठाइयों के विशेष स्वाद के साथ लोंगो को होली का ख़ास तोहफा देने की तैयारी में है। 'मूलचंद स्वीट्स' एवं 'मदन लाल स्वीट्स' अपने तेवर में तो हैं ही इसके अलावा ग्राहकों के लिए पिछले चार पीढ़ी से मुजफ्फरनगर वासियों की सेवा में चला आ रहा 'श्री राम स्वीट्स' समोसे के लिए विशेष तौर पर जाना जता है। यही पर स्थित 'जैन स्वीट्स' व 'श्री श्यामा नन्द स्वीट्स' से बात करने पर मालूम हुआ की होली पर हर बार ग्राहकों के लिए विशेष छूट और मिठाइयों की नइ वैराइटी का भी आनंद मिलता है। इसके अलावा सन १९९८ से चल रही 'गर्म स्वीट्स' ने बताया की ग्राहकों में ज्यादा मांग गुझिया, समोसे और हर बार कुछ नयी वैराइटी की मांग उठती है।

Tuesday, March 5, 2013

=> पुलिस प्रशासन और न्याय की बिसंगति देती है भ्रस्टाचार का जन्म


                          आज जब प्रगतिशील भारत अपने बिभिन्न पहुलओं को मजबूत करने में जुटा है तो पूरे भारत में इसकी पहचान बन रही है, चाहे रूस के साथ परमाणु समझौता हो या कोपेनहेगन का जलवायु समझौता! मगर आबादी की नजर से दूसरा स्थान प्राप्त भारत आज अपनी पहचान बनाने के बावजूद गरीब व शक्तिहीन जान पड़ता है! यहाँ की बड़ी मछालियाँ,छोटी मछालियों को न तो बढ़ने देती है और न ही मरने ही देती है अपितु उनका खून चूस कर उन्हें तड़पता देख आनंद की अनुभूति करती हैं!
                 पृथ्वी पर उपस्थित हर आदमी शरीफ, इमानदार होता है, यहाँ की परिस्थितियां उसे चोर, निकम्मा व पथभ्रस्त बना देती हैं!यदि समय-परक उचित-न्याय की व्यवस्था ठीक तरह से काम करने लगे तो ज्यादातर आबादी गलत रास्ते पर जाने से रूक सकती है! सवाल यह है की आम आदमी हत्यारा कैसे बनता है?? तो सबसे पहले यही उत्तर आता है की न्याय नहीं मिला जिसके चलते वह ऐसा करने पर मजबूर हो गया!!!
                   आज अधिकतर लोग जुर्म सहने के बावजूद भी थान्हे पर रिपोर्ट लिखवाने से कतरातें है क्योंकि वो जानते हैं की समाज की बड़ी मछालियाँ न्याय नहीं होने देंगी! इन बड़ी मचलियों का बहुत बड़ा समूह है जो अबिरत एक दूसरे को सहायता पहुंचाते रहते है और गरीब माँ बहनों की इज्जत व मान सम्मान से खेल कर मुस्कुराते है!
आज न्याय ब्यवस्था और पुलिस प्रशासन व सरकार सभी पैसे पर बिक रहे है अंतर है तो इनके  रेट का और इशी रेट  की मार में आम आदमी पिस रहा है!
आज हर सख्श टेंशन में जी रहा है चाहे बच्चा हो, बुजुर्ग हो या युवा! जहाँ बच्चे पढाई के टेंशन में है वही युवा करियर व बुजुर्ग अपनी हालात के चलते टेंशन में है! टेंशन में होते हुए भी कोई दुनिया की दौड़  में पीछे नहीं होना चाहता! हर कोई अचानक और कम समय में दुनिया के नामचीन लोंगो में शुमार होना चाहता है! जब लोग इशी भागदौड़ में दूसरे से पीछे हो जाते हैं तो शार्टकट का सहारा लेते हैं और यही शार्टकट देता है भ्रस्टाचार रुपी राक्षश का जन्म! इसके लिए हम सभी को आगे आने की जरूरत है तभी यह कुछ कम हो सकता है!!वैसे ज्यादातर परिस्थितिओं में हम खुद ही अपनी समस्यानो के जन्मदाता है......कवि दिनकर की ये पंक्तिया हमें हमारी औकात बता देती है----
      रात यूँ  कहने लगा हमसे गगन का चाँद
आदमी भी क्या अनोखा जीव होता है
  उलझने अपनी बनाकर आप ही फंसता
    और फिर बेचैन हो जगता न सोता है......